- दलित सम्मान के सवाल पर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस
- राहुल गांधी के बाद उत्तराखंड के दिग्गजों ने संभाला मोर्चा
- भाजपा ने कहा-कांग्रेस भ्रम फैला रही, कांग्रेस का सवाल-कार्रवाई कब?
मोहम्मद शाह नज़र
देहरादून। हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उत्तराखंड की सियासत का बड़ा मुद्दा बन गया है। यह मामला अब केवल एक कार्यक्रम स्थल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ’दलित सम्मान, सामाजिक समानता, संविधान और राजनीतिक शुचिता’ के सवाल तक पहुंच गया है। कांग्रेस इसे दलितों के सम्मान और संविधान की भावना पर हमला बता रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक रंग देकर जनता को भ्रमित कर रही है।
राहुल गांधी की ओर से 29 अगस्त को इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता भी खुलकर मैदान में उतर आए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व चकराता विधायक प्रीतम सिंह व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा पर तीखे हमले किए। जवाब में भाजपा ने भी मोर्चा संभालते हुए कैबिनेट मंत्री खजानदास के जरिए कांग्रेस पर पलटवार किया। इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ’हल्द्वानी में हुआ कथित शुद्धिकरण आखिर किस मानसिकता का प्रतीक है और इस मामले में अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?’
हरीश रावत बोले-शुद्धिकरण संविधान पर प्रहार
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हल्द्वानी की घटना को संविधान की भावना, सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों पर प्रहार बताया। उनका कहना है कि जिस मंच से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भाषण दे रहे थे, उसी स्थान पर शुद्धिकरण की रस्म किया जाना मानसिकता को दर्शाता है।
रावत ने सवाल उठाया कि शुद्धिकरण करने वाले लोग कौन थे और उनका भाजपा से क्या संबंध है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद भाजपा के राज्य नेतृत्व, राज्य सरकार और केंद्र सरकार की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि देश के संविधान ने छुआछूत और भेदभाव को स्वीकार नहीं किया है। कांग्रेस इस मानसिकता के खिलाफ पहले भी आवाज उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी। कांग्रेस की ओर से इस मामले में ज्ञापन देने और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में विरोध दर्ज कराने का भी दावा किया गया है।
प्रीतम सिंह ने पूछा-कार्रवाई के बजाय बयान क्यों?
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य व प्रीतम सिंह ने भी घटना को संविधान की भावना, सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से ऐसे मामलों में कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन उत्तराखंड में कार्रवाई के बजाय बयानबाजी देखने को मिल रही है। प्रीतम सिंह का आरोप है कि मुख्यमंत्री इस मामले पर ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनसे विवाद और गहरा रहा है, जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की ओर से कथित तौर पर इस तरह के कृत्य का बचाव किया जा रहा है।
गणेश गोदियाल का सवाल-शिकायतों पर एफआईआर कब?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि यदि राज्यसभा में मामले को गंभीरता से उठाया गया और कार्रवाई के निर्देश की बात कही गई, इसके बावजूद उत्तराखंड में कार्रवाई नहीं होती है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के खिलाफ दी गई शिकायतों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने प्रदेशभर के पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई।
गोदियाल ने कहा कि सरकार को अपने लोगों को बचाने के बजाय कानून का समान और निष्पक्ष रूप से पालन सुनिश्चित करना चाहिए। राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठाए जाने के बाद अब केंद्र से लेकर राज्य तक दबाव बनने की उम्मीद है।
भाजपा का पलटवार-दलित सम्मान के नाम पर भ्रम फैला रही कांग्रेस
कांग्रेस के हमलों के बीच भाजपा ने भी पलटवार किया। भाजपा प्रदेश मुख्यालय में कैबिनेट मंत्री खजानदास ने कहा कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों से बचने के लिए जातीय राजनीति को ढाल बना रही है और दलित अपमान का मुद्दा उठाकर देवभूमि की सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचा रही है।
खजानदास ने कहा कि हल्द्वानी में जिस शुद्धिकरण कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस भाजपा पर आरोप लगा रही है, उसका आयोजन ’श्रीराम सेना धर्मार्थ न्यास’ नाम की संस्था ने किया था। उनके अनुसार संस्था के पदाधिकारियों ने स्वयं स्पष्ट किया है कि उसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में पूरे कार्यक्रम को सीधे भाजपा से जोड़ना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।
‘दलित विरोधी भावना नहीं थी’
भाजपा की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित संस्था ने कार्यक्रम के पीछे किसी प्रकार की दलित विरोधी भावना से इनकार किया है। भाजपा के अनुसार संस्था का दावा था कि कार्यक्रम कांग्रेस की सभा में लगाए गए कथित धार्मिक नारों और कथित हिंदू विरोधी तत्वों की मौजूदगी के विरोध में किया गया था। खजानदास ने कांग्रेस से सवाल किया कि वह धार्मिक नारों से जुड़े कथित विवादों पर चुप क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक विवाद खड़ा कर अपने वोट बैंक की राजनीति को साधने का प्रयास कर रही है।
आंबेडकर का नाम लेकर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
भाजपा ने राहुल गांधी के दलित सम्मान से जुड़े बयान पर कांग्रेस के इतिहास को भी निशाने पर लिया। खजानदास ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की चुनावी हार और उन्हें भारत रत्न दिए जाने के मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस से उसके ऐतिहासिक रवैये पर सवाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज आंबेडकर के नाम पर राजनीति कर रही है, लेकिन उसके शासनकाल में उन्हें भारत रत्न नहीं दिया गया।
वर्ष 1990 में उन्हें भारत रत्न मिलने का उल्लेख करते हुए भाजपा ने कांग्रेस पर दलित प्रेम को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने का आरोप लगाया। खजानदास ने कांग्रेस से जुड़े एक पुराने विवाद का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि जब यशपाल आर्य कांग्रेस छोड़कर गए थे, तब उनकी तस्वीर को कांग्रेस भवन से बाहर फेंके जाने की घटना हुई थी। भाजपा ने इसे कांग्रेस के दलित सम्मान के दावों पर सवाल खड़ा करने वाला उदाहरण बताया।
राज्यसभा से सड़क तक पहुंचा मामला
हल्द्वानी का कथित शुद्धिकरण अब उत्तराखंड की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है। राज्यसभा में मामले का उठना, भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से कार्रवाई को लेकर दिया गया कथित जवाब और इसके बाद राहुल गांधी का मुद्दा उठाना इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ले आया है। एक ओर कांग्रेस इसे ’दलित सम्मान और संविधान की रक्षा का सवाल’ बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे ’कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और तुष्टिकरण की राजनीति’ से जोड़ रही है।
सबसे बड़ा सवाल-बयानबाजी के बाद कार्रवाई कब?
इस पूरे विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि ’कानूनी कार्रवाई’ का है। कांग्रेस का दावा है कि शिकायतें दी गई हैं, लेकिन आरोपियों के खिलाफ अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। भाजपा का कहना है कि जिस संस्था ने कार्यक्रम किया, उसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है और कांग्रेस तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।
ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि घटना में कानून का उल्लंघन हुआ है तो जांच के बाद जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई कब होगी? और यदि आरोप राजनीतिक रूप से लगाए जा रहे हैं तो सरकार इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करती?
फिलहाल हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ ’दलित सम्मान बनाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप’ की लड़ाई में बदल चुका है। कांग्रेस जहां इसे संविधान और सामाजिक न्याय की कसौटी पर देख रही है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की राजनीतिक साजिश बता रही है। लेकिन जनता की नजर अब इस बात पर है कि यह विवाद ’सिर्फ बयानबाजी और प्रेस कांफ्रेंस तक सीमित रहता है या जांच और कार्रवाई की दिशा में भी आगे बढ़ता है।’


