देहरादून। नीट यूजी में फर्जी दस्तावेज मामले में जांच कर रही एसआईटी टीम ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर बने फर्जी सर्टिफिकेट से एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन लेने वाले आरोपियों की जांच के लिए हरिद्वार पहुंची थी। इस मामले में दो आरोपियों को पूछताछ के लिए देहरादून के रायपुर थाने बुलाया गया था। पूछताछ के बाद वहीं दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
देहरादून एसएसपी और एसआईटी टीम ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान गिरफ्तारियों का खुलासा किया है। अब तक गिरोह के सरगना रूपेश पंडित ओर अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया गया है। एसआईटी ने खुलासा किया है कि फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 45 लाख रुपए में सौदा हुआ था। तीन लोगों ने एडवांस के तौर पर 20 लाख रुपए दिए थे। 12 आरोपी अभी भी संदिग्ध हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
नीट यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश के प्रकरण में 02 अभियुक्तों को पुलिस ने किया गिरफ्तार।https://t.co/wR8yPZKFlT pic.twitter.com/FUEFaRF2Of
— Dehradun Police Uttarakhand (@DehradunPolice) September 22, 2026
एसआईटी के अनुसार आरोपी अरविंद कुमार ने खुलासा किया कि उसने अपनी बेटी के फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 20 लाख रुपए दिए थे। अरविंद की बेटी के खिलाफ भी थाना रायपुर में मुकदमा दर्ज हुआ था। उत्तराखंड का एमबीबीएस फर्जीवाड़ा नीट-यूजी काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और अन्य स्थानीय आरक्षण कोटे का लाभ लेने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने और उनके जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाने का मामला है।
ऐसा आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने मृत या अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के फर्जी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाकर राज्य कोटे की आरक्षित एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर प्रवेश हासिल किया। जांच में सामने आया कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम और जाली दस्तावेजों का उपयोग करके कई अलग-अलग अभ्यर्थियों ने खुद को उनका पोता/आश्रित बताकर कोटे का लाभ ले लिया।
दिलचस्प बात ये है कि असली परिवार ने ऐसे किसी लाभ का दावा ही नहीं किया था। यहां तक कि फर्जी प्रमाण पत्रों पर एआई-जनरेटेड तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया। इसके बाद व्हिसलब्लोअर और पत्रकारों द्वारा स्वास्थ्य मंत्री और प्रशासन को सौंपे गए दस्तावेजों में 350 से अधिक डोमिसाइल यानी निवास और अन्य आरक्षित श्रेणियों जिनमेंएससी एसटी ओबीसी आदि के प्रमाण पत्र भी संदिग्ध बताए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस प्रशासन ने एसपी ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया है। एसआईटी, एसडीएम और पटवारी कार्यालयों से जुड़े दस्तावेजों और सरकारी प्रक्रिया की गहराई से जांच कर रही है। संदिग्ध प्रमाण पत्रों को निरस्त करने और संलिप्त लोगों पर मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है।

