- देहरादून में बाहरी छात्रों के उत्पीड़न का मामला
- जमीअत ने जिलाधिकारी से की सख्त कार्रवाई की मांग
देहरादून। उत्तराखण्ड में अन्य राज्यों से शिक्षा प्राप्त करने आए छात्रों, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के साथ कथित उत्पीड़न और भेदभाव का मामला सामने आया है। इस संबंध में जमीअत उलेमा-ए-हिन्द, जिला देहरादून के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल मन्नान कासमी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व बाहरी राज्यों, खासकर बिहार आदि से आए छात्रों और उनके परिजनों के साथ अवैध तरीके से दस्तावेजों की जांच, अभद्र व्यवहार और धार्मिक भावनाएं आहत करने जैसी गतिविधियां कर रहे हैं। इसे संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।
उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि अनुच्छेद 14, 19 और 28 के तहत सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकार प्राप्त हैं, जिनका हनन किया जा रहा है। साथ ही, ऐसे कृत्य भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आते हैं। जमीअत उलेमा-ए-हिन्द ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
साथ ही बाहरी छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के लिए भी खतरा हैं। संगठन ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मामले में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करेगा। इस मौके पर नगर अध्यक्ष मुफ्ती अयाज़ अहमद, कोषाध्यक्ष मास्टर अब्दुल सत्तार व हसन अहमद आदि मौजूद रहे।



