धर्म के नाम पर पलायन को विवश करना राज्य की छवि पर धब्बा : हरीश

stain on the image of the state

भाजपा मुद्दे की तलाश में है, मगर मुद्दे से महत्वपूर्ण राज्य की छवि है
लैंड जिहाद व लव जिहाद करने वाले गिरोहों को सामने लाए सरकार

देहरादून। stain on the image of the state उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश की वर्तमान प्रस्थितियों पर गंभीर टिप्पणी की है। हरदा ने लिखा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को केवल एक शब्द ‘पुष्टिकरण’ ही याद कराया गया है।

हरीश रावत ने लिखा कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष को शायद एक ही शब्द सिखाया गया है तुष्टीकरण। न वो, न उनकी सरकार कोई पुष्टिकरण का काम कर रही है। इसलिए कांग्रेस जब भी एक सही रास्ता सरकार को दिखाती है तो भारतीय जनता पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष तत्काल तुष्टीकरण के बयान के साथ उपस्थित हो जाते हैं, उनको राज्य के लोगों को यह बताना चाहिए कि ये लव जिहाद के मामले इधर ही 2-4 वर्षों से क्यों बढ़ रहे हैं? और मैं पूरी सूचना के साथ कह रहा हूं, जमीनों पर चाहे वह वन भूमि की जमीनें कब्जाने के मामले हों, मामले भी इधर ही भाजपा के शासन में बढ़े हैं।

आप रिस्पना और बिंदाल में जाइए, आप हरिद्वार के कुछ क्षेत्रों में जाइए, रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी इन सब क्षेत्रों में जाइए, नई बसासतें बसाई जा रही हैं, भाजपा के कुछ विधायकों के लिए तो यह प्रसिद्धि है कि उनको मत देने वाले 10 प्रतिशत लोग वो हैं जिनके नाम केवल मतदाता सूची में दर्ज हैं, उनमें से कुछ लोग उस शहर से बाहर रहते हैं और कुछ लोग राज्य से भी बाहर रहते हैं, आप हरिद्वार और देहरादून में लोगों से पूछ लीजिए तो लोग ऐसे विधायकों के नाम बता देंगे।

अपने खटमल न देखना और दूसरे के शरीर पर लीख खोजने चलना, यह भाजपा का शगल है। यदि कुछ लोग सुनियोजित तरीके से वन भूमि पर या सरकारी भूमि पर कब्जा करा रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा? केवल लैंड जिहाद और डेमोग्राफिक बदलाव कह देने से तो काम नहीं चलेगा।

दोनों के खिलाफ देश का कानून है : Harish Rawat

राज्य सरकार का दायित्व है कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें और ऐसा करने वाले गिरोहों को सामने लाएं, उसी तरीके से सुनियोजित तरीके से लव जिहाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो दोनों के खिलाफ देश का कानून है।

राज्य सरकार यह बताए ऐसा करने वाले कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है? वर्षों से उत्तराखंड की गोदी में बसे हुए लोगों को धर्म के नाम पर यदि आप अपना घर-बार छोड़ने के लिए विवश करोगे तो इससे राज्य की शांतिपूर्ण छवि पर धब्बा लग रहा है।

मैं जानता हूं भाजपा मुद्दे की तलाश में है लेकिन मुद्दे से महत्वपूर्ण राज्य की छवि और राज्य की प्रतिष्ठा है, इस राज्य में रहने वालों की प्रतिष्ठा है। हमारी सामूहिक पहचान को कमजोर मत करो।

संस्कृति, परिवेश परंपराओं की रक्षा के लिए हम सब हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जो भी उत्तराखंडवासी हैं, सब एक साथ खड़े हैं। पंचायतों महा पंचायतों का यह प्रपंच यहीं रुक जाना चाहिए, कहीं जाती उन्माद, कहीं लव जिहाद उन्माद, यह राज्य के लिए शुभ लक्षण नहीं हैं।

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