- रेखा आर्य ने साहस दिखा अपने पति पर कराया मुकदमा
- साहू ने रेखा आर्य पर लगाया 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप
- गिरधारी लाल ने वीडियो जारी कर आरोपों को बताया निराधार
- जमीन के सौदों से लेकर किडनी प्रत्यारोपण की शिकायत और जैन दंपती हत्याकांड तक में सामने आया था साहू का नाम
- बिहार की लड़कियों को लेकर दिए बयान पर भी हुआ था विवाद
मोहम्मद शाह नजर
देहरादून। Political upheaval in Uttarakhand उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने सत्ता, परिवार, कथित घरेलू हिंसा और भ्रष्टाचार के आरोपों को एक ही बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। प्रदेश की बाल विकास एवं महिला सशक्तीकरण मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। मंत्री ने पति पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, मारपीट, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, धोखाधड़ी, पूर्व विवाह की जानकारी छिपाने और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
वहीं, मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब 16 अक्टूबर को गिरधारी लाल साहू ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पत्नी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने रेखा आर्य पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनके पास 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति है। साहू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले की जांच कराने की मांग भी की।
उन्होंने रेखा आर्य की ओर से साझा किए गए ऑडियो को फर्जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार बताया। हालांकि, साहू ने 210 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है। इसी तरह, ऑडियो की वास्तविकता और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
पहले पत्नी का वीडियो, फिर पति का पलटवार
15 अक्टूबर को रेखा आर्य ने सोशल मीडिया पर भावुक वीडियो साझा किया और अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि एक ऑडियो सामने आने के बाद उन्हें गंभीर आशंकाएं हुईं और उन्होंने अपने तथा बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए कानूनी कार्रवाई का फैसला किया।
मंत्री की शिकायत के अनुसार, उनके पति ने पूर्व विवाह की जानकारी छिपाकर उनसे शादी की थी। उन्होंने पति पर दूसरी महिलाओं से संबंध रखने, विरोध करने पर मारपीट और अपमानित करने तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए। शिकायत में एक ऑडियो का हवाला देते हुए हत्या की साजिश की आशंका भी जताई गई है।
मामला दर्ज होने के अगले दिन गिरधारी लाल साहू ने अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया। उन्होंने आरोपों को निराधार बताया और दावा किया कि ऑडियो को एआई की मदद से तैयार किया गया है। उन्होंने रेखा आर्य से एफआईआर वापस लेने और अपने बयान वापस लेने की अपील की।
साहू ने यह भी दावा किया कि वह लगभग 17 वर्षों से रेखा आर्य के राजनीतिक जीवन में उनका साथ देते रहे हैं और चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। वीडियो में उन्होंने अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए रेखा आर्य के राजनीतिक सफर को लेकर भी टिप्पणी की।
210 करोड़ रुपये की संपत्ति का दावा, जांच की मांग
गिरधारी लाल साहू के वीडियो में सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस आरोप की हो रही है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि कभी पांच रुपये तक नहीं होने की स्थिति से आज रेखा आर्य के पास 210 करोड़ रुपये की संपत्ति कैसे पहुंच गई। उन्होंने इसे कथित अवैध संपत्ति बताते हुए मुख्यमंत्री से किसी सक्षम एजेंसी के माध्यम से जांच कराने की मांग की। साहू ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले मुख्यमंत्री से रेखा आर्य के कथित भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। हालांकि, इस दावे के समर्थन में शिकायत की प्रति, संपत्तियों का विवरण, आय के स्रोत या अन्य दस्तावेज सार्वजनिक रिपोर्टों में सामने नहीं आए हैं।
आखिर कौन हैं गिरधारी लाल साहू?
गिरधारी लाल साहू को उत्तराखंड में रेखा आर्य के पति और राजनीतिक गतिविधियों में उनके सहयोगी के रूप में जाना जाता है। वह पप्पू गिरधारी नाम से भी चर्चित रहे हैं। उनके बारे में सार्वजनिक चर्चा केवल मौजूदा वैवाहिक विवाद तक सीमित नहीं है। पुराने भूमि विवादों, एक किडनी प्रत्यारोपण संबंधी शिकायत, बरेली के चर्चित जैन दंपती हत्याकांड में नाम सामने आने और कुछ विवादित बयानों को लेकर भी वह सुर्खियों में रहे हैं।
2016 के जमीन विवादः पांच मुकदमों का उल्लेख
गिरधारी लाल साहू से जुड़े पुराने मामलों में जमीन के लेनदेन के विवाद प्रमुख रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्तराखंड हाईकोर्ट के 23 जनवरी 2017 के आदेश में वर्ष 2016 के दौरान उनके खिलाफ जमीन के लेनदेन से जुड़े पांच मुकदमों का उल्लेख था। इन मामलों में धोखाधड़ी और धमकी जैसे आरोप लगाए गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें से तीन प्राथमिकी 30 नवंबर 2016 को समझौते के आधार पर निरस्त कर दी गई थीं।
शेष मामलों में भी जमीन के सौदों, भुगतान और कब्जे से जुड़े विवादों का उल्लेख मिलता है। एक मामले में खरीदारों की ओर से आरोप लगाया गया था कि जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद भी उन्हें कब्जा नहीं मिला और अतिरिक्त भुगतान के बावजूद विवाद का समाधान नहीं हुआ। साहू ने संबंधित प्राथमिकी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
बरेली का जैन दंपती हत्याकांड में भी आया था नाम
गिरधारी लाल साहू का नाम बरेली के कारोबारी नरेश जैन और उनकी पत्नी पुष्पा जैन की हत्या के पुराने मामले में भी सामने आया था। यह घटना 11 जून 1990 की बताई जाती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस दोहरे हत्याकांड की जांच के दौरान साहू का नाम सामने आया था। अगस्त 2021 में प्रकाशित रिपोर्टों में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने का उल्लेख भी किया गया था। बाद में उन्होंने अदालत में पेश होकर हाईकोर्ट के आदेश से संबंधित दस्तावेज दाखिल किए थे।
किडनी प्रत्यारोपण की शिकायत ने भी खींचा था ध्यान
अक्टूबर 2017 में साहू के पूर्व कर्मचारी नरेश गंगवार की ओर से एक शिकायत दिए जाने की खबर सामने आई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उन्हें श्रीलंका जाकर किडनी देने के बदले मकान और पैसे देने का आश्वासन दिया गया था।
बिहार की लड़कियों को लेकर बयान पर भी हुआ था विवाद
गिरधारी लाल साहू जनवरी 2026 में भी अपने एक बयान को लेकर विवादों में आए थे। रिपोर्टों के अनुसार, सोमेश्वर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बिहार से शादी के लिए लड़कियां मिलने संबंधी टिप्पणी की थी। इस बयान को लेकर बिहार और उत्तराखंड में विरोध हुआ था। बयान को महिलाओं के सम्मान और विवाह को लेकर आपत्तिजनक मानते हुए आलोचना की गई थी। इस विवाद ने साहू को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में ला दिया था।
रेखा आर्य भी पहले विवादों में रही हैं
इस पूरे घटनाक्रम में केवल गिरधारी लाल साहू का पुराना रिकॉर्ड ही चर्चा में नहीं है। रेखा आर्य के कुछ सरकारी निर्णय और उनसे जुड़े विवाद भी पहले सुर्खियां बटोर चुके हैं। वर्ष 2022 में उनके विभाग की ओर से जारी एक पत्र को लेकर विवाद हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, पत्र में कर्मचारियों, अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से शिवालयों में जल चढ़ाने और उसकी तस्वीर साझा करने को कहा गया था। विपक्ष ने इस निर्देश पर सवाल उठाए थे।
सितंबर 2024 में बरेली में उत्तराखंड सरकार के बोर्ड और लाल-नीली बत्ती लगी एक गाड़ी को लेकर भी विवाद सामने आया था। उस मामले में रेखा आर्य ने कल्पना मिश्रा और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आधार कार्ड और पासपोर्ट में गिरधारी लाल साहू का नाम तथा बरेली का पता इस्तेमाल करने के आरोप के साथ सात लाख रुपये नकद और सोने जड़ी रुद्राक्ष माला चोरी होने का आरोप भी शामिल था।
शादी, पूर्व विवाह और पारिवारिक विवाद का पहलू
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रेखा आर्य और गिरधारी लाल साहू का विवाह 6 जुलाई 2004 को बरेली में हुआ था। वर्तमान शिकायत में रेखा आर्य ने आरोप लगाया है कि साहू ने अपने पूर्व विवाह की जानकारी उनसे छिपाई थी। उन्होंने वैवाहिक संबंधों में धोखे और दूसरी महिलाओं से संबंधों का भी आरोप लगाया है।
राजनीतिक असरः महिला सुरक्षा से भ्रष्टाचार तक बहस
इस विवाद का राजनीतिक असर भी दिखाई देने लगा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने रेखा आर्य के वीडियो पर चिंता जताते हुए उनके प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण की जिम्मेदारी संभालने वाली मंत्री की ओर से घरेलू उत्पीड़न के आरोप सामने आना गंभीर विषय है।
विपक्ष ने इस प्रकरण को प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के सवाल से जोड़ा है। दूसरी ओर, साहू ने अपने वीडियो के माध्यम से भ्रष्टाचार के आरोप उठाकर मामले को एक नए राजनीतिक और प्रशासनिक विमर्श में ला दिया है।
अब किन सवालों के जवाब जरूरी?
मौजूदा विवाद में कई ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही मिल सकता है। रेखा आर्य की शिकायत में लगाए गए घरेलू हिंसा, धमकी और धोखाधड़ी के आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य हैं? जिस ऑडियो को लेकर हत्या की साजिश की आशंका जताई गई है, उसकी प्रामाणिकता क्या है? क्या उसकी स्वतंत्र फॉरेंसिक जांच होगी? साहू की ओर से लगाए गए 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति के आरोप का आधार क्या है?
क्या उन्होंने कोई लिखित शिकायत और दस्तावेज संबंधित एजेंसी को सौंपे हैं? दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच किस एजेंसी द्वारा और किस समयसीमा में पूरी की जाएगी? पुराने भूमि विवादों और अन्य शिकायतों की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है? इन सवालों का उत्तर किसी एक पक्ष के वीडियो या बयान से नहीं, बल्कि स्वतंत्र जांच, दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही मिल सकता है।







