सील करने का आश्वासन देकर शहीद कर दी गई सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद

सील करने का आश्वासन देकर शहीद कर दी गई सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद

सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को शनिवार तड़के करीब पांच बजे प्रशासन की कार्रवाई में ध्वस्त कर दिया गया। हालांकि देर रात तक जिला प्रशासन की और से कहा जा रहा था कि मस्जिद को सील किया जाएगा, मगर सुबह होते ही मस्जिद को शहीद कर दिया गया। कार्रवाई के बाद मस्जिद की पुरानियत, जमीन के स्वामित्व और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है।

मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह धार्मिक स्थल कलेक्ट्रेट परिसर के निर्माण से पहले से मौजूद था। पक्ष की ओर से अदालत में वर्ष 1911 का बिजली बिल और पुराने राजस्व रिकॉर्ड पेश किए जाने की बात कही गई। मस्जिद पक्ष का दावा है कि पुराने खेवट रिकॉर्ड में वाहिद खां और याकूब खां के नाम दर्ज थे। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की ओर से भी दावा किया गया कि पुराने समय में इन जमींदारों की जमीन पर कलेक्ट्रेट विकसित हुआ था और जमीन सरकार को दिए जाने का इतिहास इससे जुड़ा है।

प्रशासन के अनुसार संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में सरकारी जमीन/कचहरी की भूमि के रूप में दर्ज है। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी भूमि पर बनी थी और उसे हटाने की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। मामला अदालत तक पहुंचा। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से जमीन को सरकारी मानते हुए बेदखली का आदेश दिया गया था, जिसे जिला अदालत ने भी बरकरार रखा।

मस्जिद पक्ष की ओर से ऐसा दावा जरूर किया गया है, लेकिन उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में अभी ऐसा निर्णायक निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि पूरी कलेक्ट्रेट की जमीन मुस्लिम जमींदारों की निजी संपत्ति थी और उन्होंने उसे सरकार को दान किया था। इस दावे की पुष्टि के लिए पुराने खेवट, खतौनी, सनद, दानपत्र, हस्तांतरण विलेख अथवा ब्रिटिशकालीन सरकारी रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।

मस्जिद पक्ष ने 1911 के बिजली बिल को पुराने अस्तित्व का प्रमाण बताया, जबकि प्रशासन ने इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। अदालत में भी यह दस्तावेज जमीन के मालिकाना हक का निर्णायक प्रमाण नहीं बन सका। अब बड़ा सवाल यह है कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड में जमीन किसके नाम थी और बाद में वह सरकार के नाम किस प्रक्रिया से दर्ज हुई?

साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि शुक्रवार रात सील करने की बात के बाद शनिवार तड़के करीब पांच बजे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किस आदेश और प्रक्रिया के तहत की गई।
मामले में अंतिम सच पुराने राजस्व और हस्तांतरण रिकॉर्ड से ही सामने आएगा।