- देहरादून में गूंजी निष्पक्ष पत्रकारिता की गूंज
- नारद जयंती पर बुद्धिजीवी फाउंडेशन किया खास आयोजन
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में पत्रकारिता के पुरोधाओं और कलम के सिपाहियों का बड़ा समागम हुआ। बुद्धिजीवी फाउंडेशन (भारत) की ओर से नारद जयंती के अवसर पर शहर के इंदर रोड स्थित प्रेक्षागृह में ‘पत्रकारिता का स्वरूप’ विषय पर एक विमर्श और वरिष्ठ पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
इस मौके पर संस्था के संस्थापक स्वर्गीय भव्य निधि शर्मा को उनकी 19वीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। दशकों से समाज को आईना दिखा रहे 16 वरिष्ठ पत्रकारों को ‘ऋषि नारद पत्रकार सम्मान 2026’ से नवाजा गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एस. फारूक ने अभिनंदन करते हुए कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य निष्पक्ष, साहसी और जनहितैषी पत्रकारिता को सम्मानित करना और समाज के समक्ष वरिष्ठ पत्रकारों के लंबे समय से चले आ रहे योगदान को उजागर करना है। उन्होने कहा कि सच्ची पत्रकारिता ही देशभक्ति है।
मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राजेश टंडन ने कहा कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं बल्कि लोकतंत्र का वह स्तंभ है जिसके बिना समाज दिशाहीन हो सकता है। विशिष्ट अतिथि डॉ. आशुतोष सयाना, समरजीत सिंह, ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) के. जी. बहल, डॉ. माया राम उनियाल और प्रो. आई. पी. सक्सेना ने भी पत्रकारों के संघर्षों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे संस्था के महासचिव हर्ष निधि शर्मा ने स्पष्ट किया। समारोह में अग्रिमस निधि शर्मा, सागर पचौरी, आचार्य अनिल पांडेय और सुशील कान्ति जैसे प्रबुद्ध नागरिक भी मौजूद रहे जिन्होंने पत्रकारिता के गिरते और संभलते स्वरूप पर मंथन किया। इस अवसर पर डॉ. माया राम उनियाल द्वारा लिखित, सुगन्धित औषधीय पौधों से सुगंधोपचार एरोमाथेरापी नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
इन पत्रकारो का हुआ सम्मान
पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वर्गीय राजेंद्र जोशी को मरणोपरांत याद किया गया। उन्की पत्नी और बेटे को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही 55 वर्षों से पत्रकारिता करने वाले मार्तण्ड पंडित रामेश्वर दत्त शर्मा और 47 साल की पत्रकारिता सेवा देने वाले निशीथ जोशी को मंच पर सम्मानित किया गया। फाउंडेशन ने उन चेहरों को मंच दिया जिन्होंने आपातकाल से लेकर डिजिटल क्रांति तक के दौर को कवर किया है।
46 साल का अनुभव रखने वाले वी.के.शर्मा, 40 वर्ष से सक्रिय मनमोहन लखेड़ा और 36 साल की सेवा देने वाले गिरिधर शर्मा, सलीम सैफी (35 वर्ष) और 30-30 साल का अनुभव रखने वाले रमेश दत्त पालीवाल व जीत मणि पैन्यूली को भी उनकी निर्भीक रिपोर्टिंग के लिए सराहा गया। 20 से 25 साल के जुझारू करियर वाले पत्रकारों में गजेंद्र सिंह नेगी, जे. उस्मानी, ललित उनियाल, फहीम तन्हा, अवधेश नौटियाल, मौहम्मद शाह नज़र और राज पंडित को शॉल और प्रशस्ति पत्र भेंट किए गए।

