- हिमालयन कंस्ट्रक्शन का पंजीकरण किया निलंबित
- निविदा प्रक्रिया में भाग लेने पर रोक
- तीन इंजीनियर पहले ही हो चुके हैं निलंबित
देहरादून। नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के मामले में लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार और कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने निर्माण कार्य करने वाली हिमालयन कंस्ट्रक्शन का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
साथ ही अग्रिम आदेशों तक कंपनी को लोक निर्माण विभाग की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इससे पहले मामले में तीन अभियंताओं को निलंबित किया जा चुका है। मामले में हिमालयन कंस्ट्रक्शन में हिस्सेदार रुचि भट्ट की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि कंपनी से जुड़े मामले में जो भी जिम्मेदारी बनती है, उससे वह पीछे नहीं हटेंगी।
भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई थी सड़क
देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-72 पर उत्तरांचल विश्वविद्यालय के पास टौंस नदी के किलोमीटर 143 में पहले से क्षतिग्रस्त पुल के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण का काम कराया जा रहा था। यह कार्य 31 जनवरी 2026 को जारी अनुबंध के तहत देहरादून की हिमालयन कंस्ट्रक्शन को दिया गया था।
28 जुलाई की सुबह हुई भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के बाद पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हो गई। विभागीय जांच में सामने आया कि पुल के ऊपरी हिस्से की सुरक्षा दीवार के नीचे नदी के तेज बहाव से मिट्टी और मलबे के कटाव के कारण एप्रोच रोड को नुकसान पहुंचा।
शासन ने दिए थे प्राथमिक जांच के निर्देश
घटना को गंभीरता से लेते हुए लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डय ने 28 जुलाई को मुख्य अभियंता को मामले की प्राथमिक जांच के निर्देश दिए थे। मुख्य अभियंता की ओर से तीन अगस्त को शासन को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई। रिपोर्ट में एप्रोच रोड को नुकसान पहुंचने का प्रमुख कारण नदी के तेज बहाव से हुआ गहरा कटाव बताया गया। हालांकि, जांच के दौरान कटाव की वास्तविक गहराई का आकलन नहीं हो सका। इसके लिए जमीन के भीतर की स्थिति का वैज्ञानिक परीक्षण कराने की जरूरत बताई गई है।
जांच पूरी होने तक कंपनी पर रोक
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर लोक निर्माण विभाग ने हिमालयन कंस्ट्रक्शन के खिलाफ कार्रवाई की। कंपनी का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उसे अग्रिम आदेशों तक विभाग की किसी भी निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से रोक दिया गया है। अब आगे की जांच में भूमिगत रडार जांच और विद्युत प्रतिरोधकता परीक्षण कराया जाएगा। इससे नदी के कटाव की वास्तविक गहराई और पुल की संरचना पर पड़े प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकेगा।
अब तकनीकी जांच पर टिकी निगाहें
एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के मामले में अब आगे की कार्रवाई तकनीकी जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। प्रमुख अभियंता और विभागाध्यक्ष ई. राजेश शर्मा ने कहा कि भूमिगत रडार और विद्युत प्रतिरोधकता परीक्षण के बाद नदी के कटाव की वास्तविक गहराई तथा पुल की संरचना पर उसके प्रभाव का पता चलेगा। इसके आधार पर ठेकेदार कंपनी और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।



