उत्तराखंड में मुस्लिम समाज के साथ हो रहा अत्याचार ना काबिले बर्दाश्त

Discrimination against Muslim community in Uttarakhand

नई दिल्ली | Discrimination against Muslim community in Uttarakhand प्रेस क्लब ऑफ इंडिया नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान विश्व मानव अधिकार परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व चेयरमैन एडवाइजरी बोर्ड मौलाना अनवारुल हक़ ने कहा कि भारत में सभी को हर जगह रहने व्यापार करने,धार्मिक आजादी के साथ जीवन बिताने का पूरा अधिकार है। लेकिन उत्तराखंड में कुछ समय से अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों का हनन हो रहा है।

उत्तरकाशी में एक नाबालिग लड़की को 2 लड़के लेकर फरार हो जाते हैं और दोनों अलग-अलग धर्म से संबंध रखते थे उनके इस कार्य को धर्म के चश्मे से ना देख उनपर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए थी जो कि हुई लेकिन कुछ शरारती तत्व और कुछ संगठन के लोगों ने जो उत्पात मचाया,विवादित परचे चस्पा किए, दुकानों में तोड़फोड़ की गई पूरे उत्तराखंड से अल्पसंख्यक समुदाय को निकालने का अभियान चलाया गया और चलाया जा रहा है।

यहां तक कि इस घटना से पहले भी अल्पसंख्यक समाज के लोगों को कारोबार करने रेहड़ी पटरी लगाने और सामान की फेरी करने से रोका गया कुछ शरारती तत्व कानून अपने हाथ में लेकर किसी को भी रोकते हैं उसके साथ अभद्रता करते हैं और अपने क्षेत्र में व्यापार न करने की धमकी देते हैं, यह कहां का इंसाफ है और ऐसा नहीं कि इन घटनाओं के बारे में शासन प्रशासन को जानकारी नहीं पूरा देश इसको देख रहा है कि कुछ लोग कानून अपने हाथ में लेकर कानून संविधान का मजाक बना रहे हैं और पुलिस तमाशाई बनी हुई है।

इतना बड़ा अभियान शासन-प्रशासन की सहमति के बिना नहीं चलाया जा सकता यदि कोई व्यक्ति किसी भी समाज से कानून तोड़ता है और कोई अपराध करता है तो उसको हर हाल में सजा मिलनी चाहिए लेकिन उसकी आड़ में कोई पूरे समाज को सजा देगा यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसमें कोई शक नहीं कि उत्तराखंड में इन शरारती तत्वों को सरकार की पुश्त पनाही हासिल है नहीं तो अब तक कानून अपने हाथ में लेने वालों पर कार्यवाही हो गई होती। यह मानव अधिकारों का उल्लंघन और कानून संविधान के खिलाफ है कि हर कोई इंसान कानून अपने हाथ में लेकर सही गलत का फैसला खुद करने लगे।

विश्व मानवाधिकार परिषद मांग करता है कि उन सभी शरारती तत्वों पर तत्काल प्रभाव से लगाम लगा कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए और आगे से ऐसी घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए नहीं तो सरकार आगे आकर ऐलान करे कि ये सब कुछ हमारे इशारे पर हो रहा है, यह सब हमारे लोग हैं और अब उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समुदाय को रहने, कुछ भी कहने अगले अधिकार मांगने ,खाने-पीने कारोबार करने का कोई अधिकार नहीं है।

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