एसआईआर में मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप

एसआईआर में मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप

देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मुस्लिम मतदाताओं के नामों को लेकर सामने आ रही शिकायतों और बड़ी संख्या में दाखिल की गईं आपत्तियों को लेकर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप, स्वतंत्र जांच और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है।

धस्माना ने अपने प्रतिवेदन में देहरादून के टर्नर रोड निवासी मोहम्मद अलीम और उनकी पत्नी खशीन फारूकी के मामले को भी प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि दोनों के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज रहे हैं और वे देहरादून के स्थायी निवासी हैं। पहले वे टर्नर रोड स्थित लेन नंबर सी-26 में रहते थे और अब उसी क्षेत्र की लेन नंबर सी-24 में स्थानांतरित हुए हैं। उनके अनुसार दोनों का विधानसभा क्षेत्र भी वही है, इसके बावजूद एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के आवेदन बार-बार अस्वीकृत किए जा रहे हैं।

धस्माना ने कहा कि मोहम्मद अलीम और खशीन फारूकी के पास अपने निवास और पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं। उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों से मांग की है कि दोनों मामलों की व्यक्तिगत रूप से नए सिरे से जांच कर वर्ष 2003 की मतदाता सूची सहित सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए।

धस्माना ने एक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि ऊधमसिंह नगर जिले की किच्छा, गदरपुर, खटीमा, नानकमत्ता और रुद्रपुर विधानसभा सीटों में लगभग 6,500 फॉर्म-7 आपत्तियां केवल पांच व्यक्तियों की और से दाखिल की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन आपत्तियों में बड़ी संख्या मुस्लिम मतदाताओं के नामों को लेकर है।

प्रतिवेदन में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, किच्छा में 4,857 आपत्तियों में से 4,855 एक व्यक्ति राजेश तिवारी द्वारा दाखिल किए जाने का दावा किया गया है। इसी तरह गदरपुर में 670, खटीमा में 394 में से 392, नानकमत्ता में 391 में से 353 तथा रुद्रपुर में 230 आपत्तियां कुछ चुनिंदा व्यक्तियों द्वारा दाखिल किए जाने की बात कही गई है।

कांग्रेस नेता ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम केवल आपत्ति दाखिल होने के आधार पर न हटाया जाए। उन्होंने कहा कि यह भी जांच की जानी चाहिए कि कहीं किसी विशेष समुदाय के मतदाताओं को सुनियोजित तरीके से तो निशाना नहीं बनाया जा रहा है।