- सलीम वास्तिक व सानिउर रहमान उर्फ ‘सत्यनिष्ठा आर्य’ की गिरफ्तारी के बाद उठे कई सवाल
- कालनेमियों को संरक्षण देने वालों पर भी हो क्या कोई कार्यवाही
मौहम्मद शाह नज़र
देश में बार-बार सामने आ रहे मामलों ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है, क्या हमारी व्यवस्था फर्जी पहचान और धोखाधड़ी को रोकने में नाकाम हो रही है, या फिर अपराधी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर लंबे समय तक बच निकलते हैं?
हाल ही में 31 साल पुराने हत्या के केस में एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक के गिरफ्तार होने के बाद कई सवाल खड़े होने शुरू हो गये हैं। यह देखा गया कि कुछ आरोपी वर्षों तक पहचान बदलकर सामान्य जीवन जीते रहे। सवाल यह नहीं कि वे कौन थे, बल्कि यह है कि वे इतने लंबे समय तक पकड़े क्यों नहीं गए। क्या हमारे दस्तावेज़ सत्यापन, पुलिस रिकॉर्ड और निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी चूक है?
दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो करीब तीन दशकों से कानून की नजरों से बचता फिर रहा था। यह मामला 1990 के दशक का है, जब एक नाबालिग बच्चे के अपहरण और हत्या का अपराध सामने आया था। जांच में आरोपी को दोषी ठहराया गया था और उसे सजा भी सुनाई गई थी, लेकिन बाद में वह पैरोल पर बाहर आकर फरार हो गया। इसके बाद सलीम वास्तिक ने अपनी पहचान बदल ली और एक्स मुस्लिम के नाम की पहचान के साथ अलग-अलग जगहों पर रहकर सामान्य जीवन जीता रहा।
हाल के दिनों में उसकी पहचान दोबारा सामने आई, जब पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड और तकनीकी जांच के आधार पर उसे ट्रेस किया। इसके बाद उसे पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के समय तक वह एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक के नाम और पहचान के साथ सार्वजनिक रूप से सक्रिय था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान उसने किन-किन जगहों पर समय बिताया और किस तरह अपनी पहचान छिपा कर किन लोगों के सहयोग से रह रहा था।
सलीम वास्तिक 25 साल से फरार था, हैरानी की बात यह है कि वह टेलीविजन पर बैठकर इंटरव्यू देता था, यूट्यूब चैनलों पर बैठकर इंटरव्यू दिया करता था, उसका खुद का यूट्यूब चैनल था और उसने गाजियाबाद स्थित अपने घर पर बकायदा नाम लिखवाया हुआ था, ऐसा व्यक्ति फरार कैसे कहा जा सकता है?
बांग्लादेशी सानिउर रहमान ‘सत्यनिष्ठा आर्य’ बन, कर रहा था हिंदू धर्म का प्रचार
हाल ही के दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें एक शख्स एक पादरी को धमकाता हुआ नजर आ रहा है। वीडियो देखकर हर किसी को ये लग रहा था, की ये कोई कट्टर हिंदू है, मगर इस शख्स की असलियत ने सबको हैरान कर दिया।
उत्तराखंड के तीर्थनगरी ऋषिकेश में धार्मिक पहचान की आड़ में रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक की गिरफ्तारी से हड़कंप मच गया था, गिरफ्तार व्यक्ति वहीं, ‘सत्यनिष्ठा आर्य’ निकला जो कुछ दिन पहले पादरी को धमकाता हुआ नज़र आ रहा था। उसकी पहचान सामने आते ही कई बड़े दिग्गज साधुओं और इस का साथ देने वाले संगठनों के पदाधिकारियों के पावं तले जमीन खिसक गई।
पुलिस जांच में गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान सानिउर रहमान उर्फ सत्यसाधु के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश के फरिदपुर जिले का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक जांच के अनुसार वह वर्ष 2016 में नेपाल के रास्ते अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर गया था और उसके बाद से ही वह देश में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहा था। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए न केवल नाम बदलकर ‘सत्यनिष्ठ आर्य’ रख लिया, बल्कि एक फर्जी आधार कार्ड भी हासिल कर लिया था।
आरोपी लंबे समय से स्वयं को हिंदू धार्मिक प्रवक्ता के रूप में प्रस्तुत कर देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक और दार्शनिक प्रवचन देता रहा। वह अक्सर ऋषिकेश और लक्ष्मण झूला क्षेत्र में आता-जाता था और यहां उसने कई लोगों से संपर्क भी स्थापित कर लिए थे। हाल ही में वह लक्ष्मण झूला स्थित एक आश्रम में पहुंचा था, जहां पुलिस की नियमित जांच के दौरान उस पर संदेह हुआ।
पूछताछ के बाद उसे हिरासत में लिया गया और उसके पास से बांग्लादेशी पासपोर्ट सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और विदेशी अधिनियम 2025 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी की गतिविधियों और उसके नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके संपर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैले हुए थे।
पहचान बदलना इतना आसान क्यों?
आज के डिजिटल दौर में आधार, पैन, बैंकिंग और मोबाइल कनेक्शन जैसी कई परतें मौजूद हैं। इसके बावजूद अगर कोई व्यक्ति नई पहचान के साथ वर्षों तक सक्रिय रह सकता है, तो यह सिस्टम की आपसी कनेक्टिविटी और डेटा शेयरिंग पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। कई मामलों में देखा गया है कि सजा पाने के बाद पैरोल पर बाहर आए आरोपी गायब हो जाते हैं। इसका मतलब है कि या तो निगरानी तंत्र कमजोर है, या फिर उसके पालन में गंभीर लापरवाही होती है। पैरोल सिर्फ राहत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है, जिसकी मॉनिटरिंग उतनी ही सख्त होनी चाहिए।
फर्जी पेशे और भरोसे का दुरुपयोग
खुद को साधु, मौलवी, वकील, अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति बताकर ठगी करना कोई नई बात नहीं है। लेकिन अगर कोई लंबे समय तक ऐसा कर पाता है, तो यह केवल व्यक्ति की चालाकी नहीं, बल्कि सिस्टम के सत्यापन तंत्र की कमजोरी भी दिखाता है। बार काउंसिल, सरकारी रजिस्ट्रेशन और प्रोफेशनल डेटाबेस, क्या ये आम लोगों के लिए आसानी से जांचने योग्य हैं? अगर नहीं, तो सुधार की जरूरत साफ है।
सीसीटीवी, डिजिटल आईडी, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रेल, सब कुछ मौजूद है। फिर भी अक्सर कार्रवाई तब होती है जब नुकसान हो चुका होता है। इसका कारण है, एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और रियल-टाइम डेटा उपयोग का अभाव। समाधान किसी एक कदम में नहीं, बल्कि कई स्तरों पर सुधार में है।
सभी पहचान दस्तावेजों का बेहतर एकीकरण और रियल-टाइम वेरिफिकेशन किया जाए। पैरोल पर छूटे आरोपियों की डिजिटल ट्रैकिंग और सख्त निगरानी की जाए। प्रोफेशनल पहचान (जैसे वकील, डॉक्टर, साधू, मौलवी) की सार्वजनिक और आसान जांच व्यवस्था की जाएं। धोखाधड़ी के मामलों में तेज़ ट्रायल और कड़ी सज़ा का प्राविधान किया जाए।
नाज़िया इलाही खान भी शक के घेरे में !
वहीं, एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक के गिरफ्तार होने के बाद इसकी चेली नाज़िया हसन खान का कच्चा चिट्ठा इसके पूर्व मंगेतर पुनीत वशिष्ठ ने खोल रखा है बाकी जो अपुष्ट सूचना आ रही है उसके अनुसार नाजिया इलाही खान की सार्वजनिक केस हिस्ट्री उपलब्ध है। मुख्य केस में 2021 धोखाधड़ी का एक मामला है और कोलकाता के गिरिश पार्क थाने में इसके खिलाफ एफआइआर नंबर 116/2020 दर्ज हुई। अगस्त 2021 में कोलकाता पुलिस ने इसे गिरफ्तार किया।
आरोप है कि नाज़िया इलाही खान फर्जी वकील बनकर संदीप अग्रवाल नाम के एक व्यक्ति से लगभग 6 लाख की ठगी की और 2019 से ही खुद को सुप्रीम कोर्ट की वकील बताकर शिकायतकर्ता संदीप अग्रवाल के तलाक के केस को “जल्दी निपटाने” का वादा करती रहीं, लेकिन न तो केस हैंडल किया और न ही पैसे लौटाए। बाद में धमकी भी दी गई।
पूर्व मंगेतर पुनीत के अनुसार नाज़िया इलाही खान असल में वकील है ही नहीं ना बार काउंसिल में उसका रजिस्ट्रेशन है। इसके खिलाफ आईपीसी की धारा 419 धोखाधड़ी, 420 (धोखाधड़ी), 506 (आपराधिक धमकी), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 34 सीआरएम (।)/4251/2024 11, 2024 आदि लगा हुआ है।
जेल में रहने के बाद सितंबर 2021 में अपनी बीमारी के आधार पर इसे ज़मानत मिली। मामले की चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी। 2024 के कलकत्ता हाईकोर्ट ने नाज़िया इलाही खान पर तमाम मामलों में अपराधिक मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त उसपर जनवरी 2025 में कर्नाटक (बेलगावी) में कई जगहों पर हेट स्पीच के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।



