अभिव्यक्ति संस्था द्वारा बाल भारती स्कूल, सिविल लाइंस में कवि संतोष कुमार चतुर्वेदी के कविता संग्रह ‘उम्मीद से बनते हैं रास्ते’ (2023) पर चर्चा हुई।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी के वरिष्ठ कवि हरीश चंद्र पांडे ने की। उन्होंने अपने वक्तव्य में ‘उम्मीद से बनते हैं रास्ते’ की साहित्यिक और सामाजिक महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कविता संग्रह को आशा और प्रेरणा का प्रतीक बताया, जो कठिन समय में पाठकों को दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने संग्रह की कविताओं को नगण्यता , सूक्ष्मता और तलछट की आवाज़ को प्रकाश में लाने वाली कविताओं की तरह देखने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम के वक्ताओं में कवि विवेक निराला ने संतोष कुमार चतुर्वेदी की समकालीन दौड़ भाग पर टिप्पणी की और कविता संग्रह से उन कविताओं को उद्धृत किया जो समाज के आखि़र में खड़े व्यक्ति की आवाज़ बनती है।
निराला ने संतोष कुमार चतुर्वेदी की लेखन शैली को सहज और प्रभावी माना, जो पाठकों को गहरे चिंतन के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कुछ कविताओं में प्रयुक्त प्रतीकों और रूपकों की प्रशंसा की, जो सामाजिक यथार्थ को सूक्ष्मता से प्रस्तुत करते हैं। कवि लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता ने कविता संग्रह की विशद विवेचना की, उनका वक्तव्य कसा हुआ और कविता के हर पक्ष को टटोलता हुआ था, कविता कहाँ है और कविता कहाँ नहीं है से होते हुए उन्होंने कवि की समकालीन समझ और जुझारूपन की सराहना की।
उन्होंने कहा कि संग्रह की कविताएँ विषय की दृष्टि से वैविध्य पूर्ण हैं, भाषा की दृष्टि से एकरंगी बहुत शोर से अलग एकदम शांत गति से आगे बढ़ती हुई। कवयित्री संध्या नवोदिता ने कविता संग्रह की कविताओं में व्यक्त आशा और संघर्ष की भावना को समकालीन समाज की चुनौतियों से जोड़ा। उन्होंने विशेष रूप से कविताओं में पर्यावरण और मानवता के बीच संबंधों को रेखांकित किया।
उनके अनुसार, सन्तोष कुमार चतुर्वेदी की कविताएँ पाठकों को न केवल भावनात्मक स्तर पर छूती हैं, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी पैदा करती हैं। कविता संग्रह पर बात करते हुए कवियित्री पूजा कुमारी ने कविता संग्रह के स्त्री पक्ष पर अपने विचार रखें और कविता संग्रह के वर्तमान समय में सकारात्मक और नकारात्मक स्थिति पर बात की। कार्यक्रम की शुरुआत बसंत त्रिपाठी के स्वागत उद्बोधन से हुई, जिसमें उन्होंने उपस्थित श्रोताओं और वक्ताओं का हार्दिक अभिनंदन किया।
इसके पश्चात, कवि संतोष कुमार चतुर्वेदी ने अपने संग्रह से चुनिंदा कविताओं का पाठ किया, जिसने श्रोताओं को भावनात्मक और वैचारिक स्तर पर बाँधे रखा। शिवानंद मिश्रा के कुशल संचालन ने चर्चा को व्यवस्थित और प्रभावी बनाया। इस आयोजन में कथाकार मनोज कुमार पांडेय, संपादक हितेश सिंह, रामजी राय, अनिल रंजन भौमिक, प्रेमशंकर, प्रतिमा, आशुतोष प्रसिद्ध, शनी नारायण,आर्यन के साथ ही शहर अन्य गणमान्य मौजूद थे।
आशुतोष प्रसिद्ध