नेपाल निवासी राजपूत वर्ग की मंजुला को अनुसूचित जाति का बता रही भाजपा
सामान्य वर्ग की महिलाओं का एसटी का प्रमाण पत्र बनाकर जनजातियों के हक पर डाका डाला जा रहा
देहरादून। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ट नेता हरीश रावत ने भाजपा पर नेपाल निवासी राजपूत वर्ग की मंजुला देवी को अनुसूचित जाति का बता कर धारचूला ब्लॉक प्रमुख का पद कब्जाने का आरोप लगाया है। हरीश रावत ने सोमवार को प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि धारचूला ब्लॉक प्रमुख का पद अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित है और कांग्रेस ने यहां से अनुसूचित जनजाति की महिला पूजा देवी पत्नी मुकेश सिंह ग्वाल को ब्लॉक प्रमुख का उम्मीदावार बनाया है।
भाजपा ने मंजुला देवी पत्नी महेन्द्र सिंह बुद्धियाल को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। आरोप है कि मंजुला जन्म से जनजाति नहीं हैं, जिन तथ्यों को आरओ के पास पूजा ने प्रस्तुत किया है, उससे स्पष्ट है कि मंजुला देवी एक सामान्य जाति की महिला है, जन्म के आधार पर उनकी जाति नेपाल में राजपूत वर्ग में आती हैं।
उनके पिता गजेन्द्र सिंह बोहरा और माता सरस्वती बोहरा वृदु नाम वार्ड न.-4, गा.वि.स. व्यास, दार्चुला, नेपाल में दर्ज है। वहां के प्रशासन से इस संबन्ध में दस्तावेज भी प्राप्त कर पूजा ने रिटर्निंग आफीसर को प्रस्तुत किया है। इससे पहले मंजुला क्षेत्र पंचायत की सदस्य भी गलत दस्तावेजों के प्रस्तुतिकरण से बनी है। कांग्रेस उम्मीदरवार ने इस संबंध में भी आवश्यक तथ्य आर.ओ. के सामने रखे हैं।
आरोप है कि भाजपा अनुसूचित जनजाति की महिला के स्वभाविक अधिकार को जाली दस्तावेजों के आधार पर छीनना चाहती है। दस्तावेज बताते हैं कि मंजुला देवी सामान्य वर्ग की महिला हैं। यह सरासर भारत के संविधान और संविधान के तहत पारित तद्संबंधी कानून का भी खुला उल्लघन है। भाजपा का यह कदम जनजाति विरोधी है।
एक तरफ जनजाति की उच्च शिक्षित महिलाएं ग्राम प्रधान बन रही हैं, दूसरी तरफ भाजपा सामान्य वर्ग की महिलाओं का अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र बनाकर जनजातियों के कानूनी अधिकार पर डाका डाल रही है। कहा कि भाजपा के इस दुस्साहस की निंदा करता हूँ और भाजपा के इस दुस्साहस के खिलाफ जाग्रत जनमत से आवाज उठाने की प्रार्थना करता हूँ।
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